व्यापार मंडल ने डीएम को सौंपा पत्र, जांच पूरी होने तक वसूली रोकने की मांग
संतकबीरनगर। जिला पंचायत की ओर से व्यापारियों पर लगाए गए विभव एवं संपत्ति कर तथा उसकी वसूली के लिए जारी आरसी को लेकर व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, उत्तर प्रदेश ने जिलाधिकारी को पत्र देकर कर निर्धारण की प्रक्रिया और उससे संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक आरसी के माध्यम से की जा रही वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।
संगठन के प्रांतीय उपाध्यक्ष अमित जैन, प्रदेश महामंत्री (संगठन)/जिलाध्यक्ष श्रवण अग्रहरि एवं विनीत चड्ढा ने जिलाधिकारी को दिए पत्र में कहा कि कई व्यापारियों को उनके विरुद्ध किए गए कर निर्धारण का स्पष्ट आधार और संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पूरी कर निर्धारण पत्रावली दिखाने के बजाय केवल वसूली रजिस्टर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे लाखों रुपये की देनदारी तय किए जाने के आधार और उसकी गणना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
व्यापार मंडल ने मांग की कि संबंधित व्यापारियों को मूल कर निर्धारण अथवा मूल्यांकन आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही Assessment List, मूल्यांकन विवरण, निरीक्षण एवं मापन रिपोर्ट, गणना-पत्र तथा नोटिस, आपत्ति और सुनवाई से संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध कराने की मांग की गई।
संगठन ने कर लगाने के आधार, निर्धारित दर, संबंधित शासनादेश और लागू वैधानिक प्रावधानों की भी जांच कराने की मांग रखी है।
प्रांतीय उपाध्यक्ष अमित जैन ने कहा कि व्यापारी वैध कर का भुगतान करने से पीछे नहीं हैं, लेकिन कर निर्धारण पारदर्शी प्रक्रिया और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को कर निर्धारण का आधार स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
प्रदेश महामंत्री (संगठन)/जिलाध्यक्ष श्रवण अग्रहरि ने कहा कि व्यापारियों को संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के साथ अपना पक्ष रखने और सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
वहीं नंदौर बाजार अध्यक्ष गोविंद बरनवाल ने कहा कि यदि व्यापारियों की शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से समाधान नहीं किया गया तो संगठन लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से आंदोलन करेगा।

