नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत ने भरोसेमंद और मजबूत व्यापारिक साझेदारी का संदेश दिया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में स्थिरता, भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
BRICS Business Forum का आयोजन 11 सितंबर को हुआ, जिसमें BRICS देशों और साझेदार देशों के सरकारी प्रतिनिधियों के साथ कारोबारी जगत, वित्तीय संस्थानों और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इस वर्ष भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।
वैश्विक झटकों से निपटने के लिए मजबूत आर्थिक साझेदारी जरूरी
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक मजबूती केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देशों को ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जो संकट के समय भी काम करती रहे।
उन्होंने लचीली और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं (Resilient Supply Chains), पूर्वानुमान योग्य कारोबारी माहौल और BRICS देशों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विदेश मंत्री के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि BRICS देशों को वैश्विक आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए आपसी सहयोग और आर्थिक संपर्क को और मजबूत करना चाहिए।
भारत का भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बनने पर जोर
भारत लगातार खुद को एक विश्वसनीय व्यापार और निवेश साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। BRICS के मंच से भी भारत ने ऐसे व्यापारिक माहौल की जरूरत बताई है, जिसमें कंपनियों को बेहतर बाजार पहुंच, स्थिर नीतियां और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला मिल सके।
BRICS के भीतर व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ नियामकीय बाधाओं को कम करना और सीमा-पार भुगतान को आसान बनाना भी इस समय कारोबार जगत की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल है।
स्टार्टअप और इनोवेशन पर भी भारत का फोकस
भारत BRICS के भीतर स्टार्टअप, इनोवेशन और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। सरकार की ओर से BRICS Incubator Network और BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहलों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया गया है।
इन पहलों का उद्देश्य BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ना और नवाचार आधारित कारोबार को बढ़ावा देना है।
व्यापार में संतुलन और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत
BRICS देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन भारत के सामने व्यापार घाटे की चुनौती भी बनी हुई है। एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2021 के करीब 74.5 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में करीब 226.1 अरब डॉलर हो गया।
ऐसे में भारत की प्राथमिकता केवल व्यापार की मात्रा बढ़ाना नहीं, बल्कि संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार को बढ़ावा देना भी है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और आसान भुगतान पर चर्चा
BRICS के आर्थिक एजेंडे में सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने के विकल्प भी महत्वपूर्ण हैं। भारत का जोर ऐसे व्यावहारिक वित्तीय तंत्र पर है, जिससे कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय लेन-देन अधिक तेज और आसान हो सके।
भारत ने BRICS देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं (CBDC) के बीच बेहतर संपर्क की संभावना पर भी जोर दिया है। हालांकि, इसके सामने तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां भी हैं।
12-13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन
BRICS Business Forum के बाद नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को BRICS Leaders’ Summit आयोजित होगा। इसमें BRICS देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को खास बना रही है।
भारत के लिए यह सम्मेलन आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक, निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है।
भारत की प्राथमिकता—व्यावहारिक आर्थिक सहयोग
BRICS की बढ़ती सदस्यता और वैश्विक आर्थिक प्रभाव के बीच भारत इस संगठन को किसी एक देश या समूह के खिलाफ मंच बनाने के बजाय व्यावहारिक आर्थिक सहयोग, व्यापार और विकास के मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर देता दिखाई दे रहा है।
नई दिल्ली सम्मेलन में व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश बढ़ाने, मजबूत सप्लाई चेन बनाने, तकनीकी सहयोग और आसान भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ठोस पहल की उम्मीद की जा रही है।

