सलेमपुर, देवरिया। शक्ति की आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होने की जानकारी देते हुए ज्योतिषाचार्य आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना कर मां भगवती का आह्वान किया जाएगा।
आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्टूबर को नवरात्रि का पहला दिन माना जाएगा। उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के लिए 11 अक्टूबर की सुबह 6:05 बजे से 6:38 बजे तक विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:31 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर संभव है।
विधि-विधान से करें कलश स्थापना
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि कलश स्थापना के लिए सबसे पहले स्वच्छ स्थान पर वेदी बनाकर मिट्टी में जौ बोएं। इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें तथा मां दुर्गा का विधिवत पूजन करें।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। श्रद्धालु इस दौरान सात्विक आहार, संयम और श्रद्धा के साथ मां की आराधना करते हैं।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति की उपासना का भी अवसर है। इस दौरान श्रद्धालु पूजा-पाठ के साथ अपने आचरण में संयम और सकारात्मकता बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।

