औरैया। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की सीमा और मासिक अधिकतम सीमा में संशोधन की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सांसद जितेंद्र दोहरे को सौंपा।
व्यापार मंडल ने ज्ञापन में कहा कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों, उद्यमियों तथा उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई ने भुगतान प्रक्रिया को आसान और सुविधाजनक बनाया है।
व्यापार मंडल के अनुसार, भारत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर निर्धारित किए जाने तथा मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा एक लाख रुपये किए जाने के संबंध में संगठन की कोर कमेटी की बैठक में चर्चा की गई।
10 हजार रुपये तक हो न्यूनतम लेनदेन सीमा
व्यापार मंडल ने मांग की कि व्यापारियों और उद्यमियों पर अतिरिक्त वित्तीय भार कम करने तथा डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए एमडीआर लागू होने की न्यूनतम लेनदेन सीमा 2,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये की जाए।
इसके साथ ही संगठन ने मासिक अधिकतम एमडीआर सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए जाने का सुझाव दिया। व्यापार मंडल का कहना है कि यूपीआई अब व्यापारिक गतिविधियों में भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, ऐसे में एमडीआर से जुड़े प्रावधानों में व्यापारियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री से दोनों सुझावों पर विचार कर आवश्यक निर्णय लेने की मांग की।
इस दौरान जिलाध्यक्ष सुधीर पुरवार, सुधीर सिंह कुशवाह, गोपालजी दुबे, सल्लू विश्नोई, आनंद विश्नोई, राजकुमार सक्सेना, बल्लू राईन, लख्मी पोरवाल, अमर मिश्रा सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे।

