तेल अवीव। फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान में ओमानी सह-पायलट द्वारा कथित तौर पर विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के बाद इजरायल की विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखने वाले देशों के पायलटों को इजरायल के लिए उड़ान भरने पर प्रतिबंध से जुड़े नियमों के बावजूद हाल के वर्षों में कई ओमानी पायलट तेल अवीव पहुंचते रहे।
रिपोर्टों के मुताबिक, चैनल 12 ने दावा किया है कि हाल के वर्षों में दर्जनों ओमानी पायलट विदेशी एयरलाइंस की उड़ानों के जरिए इजरायल पहुंचे। इसी के बाद यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित पायलटों की राष्ट्रीयता और सुरक्षा जांच की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
मामले में इजरायली सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और परिवहन मंत्रालय की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शिन बेट ने फ्लाईदुबई से ऐसे देशों के पायलटों को इस्तेमाल न करने के लिए कहा था जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन पायलटों की राष्ट्रीयता और पृष्ठभूमि की निगरानी की व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
बताया गया है कि फ्लाईदुबई की संबंधित उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार और ओमान के सह-पायलट हम्माम अल-हम्मामी मौजूद थे। घटना के दौरान सह-पायलट पर विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप है। विमान को बाद में सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया। मामले की जांच के साथ-साथ विदेशी एयरलाइंस के क्रू को इजरायल में प्रवेश की अनुमति देने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर मुख्य सवाल
- विदेशी पायलटों की राष्ट्रीयता की जांच किस स्तर पर होती थी?
- प्रतिबंधित देशों के पायलट इजरायल तक कैसे पहुंचे?
- एयरलाइंस और इजरायली सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?
- क्या घटना के बाद विदेशी फ्लाइट क्रू के लिए सुरक्षा जांच के नियमों में बदलाव किया जाएगा?
मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरक्षा प्रक्रिया में वास्तविक चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन-सी व्यवस्था जिम्मेदार थी।

