अलीगढ़। राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (RMPSU) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के बीच 40 प्रतिशत से अधिक शोध सीटें अभी खाली हैं। शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता और रुचि के अभाव के कारण इन सीटों को भरने में परेशानी आ रही है। विश्वविद्यालय ने अब पात्र शिक्षकों से नए सिरे से आवेदन मांगे हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
विश्वविद्यालय की ओर से पहले करीब 277 शोध पर्यवेक्षकों को अनुमोदित किया गया था। इसके बावजूद विभिन्न विषयों में उपलब्ध शोध सीटों का पूरा उपयोग नहीं हो सका। अब विश्वविद्यालय ने नए शोध पर्यवेक्षकों के साथ-साथ पहले से अनुमोदित पर्यवेक्षकों को भी अपने अधीन उपलब्ध रिक्त सीटों का विवरण अपडेट करने का अवसर दिया है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 29 सितंबर और 3 अक्टूबर को पीएचडी प्रवेश एवं शोध पर्यवेक्षकों से संबंधित सूचनाएं भी जारी की गई हैं।
पर्यवेक्षकों के लिए तय है शोधार्थियों की सीमा
विश्वविद्यालय के निर्देशों के अनुसार एक समय में आचार्य अधिकतम आठ, सह आचार्य छह और सहायक आचार्य चार पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। इसके तहत विश्वविद्यालय अब वास्तविक रूप से उपलब्ध शोध मार्गदर्शन क्षमता का आंकड़ा जुटा रहा है।
नए आवेदन करने वाले शिक्षकों को नियुक्ति, पीएचडी और शोध प्रकाशनों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही उन्हें पूर्व में मार्गदर्शन किए गए शोधार्थियों और वर्तमान में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी भी देनी होगी। शोध पर्यवेक्षक के लिए विश्वविद्यालय या संबद्ध महाविद्यालय का पूर्णकालिक शिक्षक होना आवश्यक है।
23 अक्टूबर को RET, 28 अक्टूबर को साक्षात्कार
विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के अगले चरण के लिए 23 अक्टूबर को रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट (RET) और 28 अक्टूबर को साक्षात्कार की तिथि निर्धारित की है। अब विश्वविद्यालय का ध्यान पात्र शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने और रिक्त शोध सीटों को भरने पर है।

