सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच शनिवार सुबह प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। जिला अदालत के फैसले के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद के ढांचे को हटाने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के प्रवेश द्वारों को सील कर दिया गया और आम लोगों की आवाजाही पर रोक रही।
जिला जज के फैसले के बाद कार्रवाई
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। जिला जज की अदालत ने मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के पूर्व आदेश को बरकरार रखा। अदालत के आदेश में संबंधित जमीन को सरकारी भूमि माना गया। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए परिसर खाली करने और क्षतिपूर्ति की कार्रवाई के आदेश दिए थे।
सुबह तड़के पहुंची प्रशासन की टीम
अदालत के आदेश के बाद शनिवार तड़के प्रशासनिक टीम जेसीबी और अन्य मशीनों के साथ कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। रिपोर्टों के मुताबिक सुबह करीब चार बजे से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ आरएएफ की तैनाती भी की गई।
सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट
मस्जिद पर कार्रवाई के बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार वह सहारनपुर जाकर मौके की स्थिति का जायजा लेने और अधिकारियों से मिलने की तैयारी में थीं। इसी बीच उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।
इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह सहारनपुर जाकर जनता की आवाज उठाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई
मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रखी गई है। प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद की जमीन और निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन की ओर से इसे सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताया गया, जबकि मस्जिद पक्ष ने इसके वक्फ संपत्ति होने समेत अन्य दावे अदालत के सामने रखे थे। मामले में दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद जिला अदालत ने मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी और पूर्व आदेश को बरकरार रखा।

