पटना। ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन के सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसमें सर्वे के दौरान जुटाए गए जमीन संबंधी आंकड़ों का राजस्व विभाग के रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। इसके बाद टाउनशिप का अंतिम आधार नक्शा तैयार किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक भूखंड की माप, स्थिति और क्षेत्रफल की जांच राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। एजेंसी को नवीनतम बंदोबस्त वर्ष के राजस्व रिकॉर्ड, अधिकार अभिलेख, मुकदमा रिकॉर्ड, जमीन के नक्शे और अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज जुटाने होंगे।
सर्वे के बाद तैयार नक्शे का अंचल स्तर पर उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। यदि मौके पर जमीन की स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति में अंतर मिलता है तो उसे नक्शे में अलग से दर्ज किया जाएगा। नक्शा सर्वे नंबर के आधार पर तैयार होगा।
हर भूखंड का अलग डेटा होगा तैयार
टाउनशिप क्षेत्र के प्रत्येक भूखंड का अलग-अलग क्षेत्रफल दर्ज किया जाएगा। इसमें मौके पर सर्वे से मिले क्षेत्रफल के साथ राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल की जानकारी भी शामिल होगी। साथ ही जमीन के स्वामित्व और उसकी श्रेणी से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। पूरा डेटा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) में भी दर्ज किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड के मिलान से जमीन से जुड़े संभावित विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे टाउनशिप की योजना और भूमि उपयोग तय करने के लिए अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे।
पटना की प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के लिए पहले भी विभिन्न प्रशासनिक और भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं।

