नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र के चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में बदलने के बाद कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने की आशंका है। मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, 26 से 29 अक्टूबर के बीच इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। दक्षिण भारत के तटीय राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है, जबकि उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान गिरने से ठंड बढ़ने के आसार हैं।
आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने का अनुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात के 28 अक्टूबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश के तट के निकट पहुंचने की संभावना है। इसके बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार करने का अनुमान जताया गया है। इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तथा झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और पुडुचेरी सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका है। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं और बारिश का दौर चल सकता है। संबंधित राज्यों में प्रशासन को सतर्क रहने और संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखने की जरूरत है।
उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड
उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सुबह तथा रात के समय ठंड का असर बढ़ने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का प्रभाव मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, इन क्षेत्रों में चक्रवात का प्रभाव स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
मछुआरों और तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह
संभावित खराब मौसम को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना चाहिए। मछुआरों को समुद्र में जाने से संबंधित जारी निर्देशों का पालन करने, तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और बिजली के खंभों तथा कमजोर पेड़ों के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के अगले बुलेटिन के आधार पर चक्रवात की दिशा, गति और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति में बदलाव हो सकता है। इसलिए लोगों को अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
स्रोत: मौसम संबंधी प्रकाशित रिपोर्टें एवं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान का समाचारों में उल्लेख।
चक्रवात ‘अर्नब’ का अलर्ट, 15 राज्यों में बारिश की चेतावनी; 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के क्षेत्र के चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ में बदलने के बाद कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने की आशंका है। मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, 26 से 29 अक्टूबर के बीच इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। दक्षिण भारत के तटीय राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है, जबकि उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान गिरने से ठंड बढ़ने के आसार हैं।
आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने का अनुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, चक्रवात के 28 अक्टूबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश के तट के निकट पहुंचने की संभावना है। इसके बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार करने का अनुमान जताया गया है। इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तथा झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
दक्षिण भारत में भारी बारिश की चेतावनी
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और पुडुचेरी सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका है। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी तेज हवाओं और बारिश का दौर चल सकता है। संबंधित राज्यों में प्रशासन को सतर्क रहने और संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखने की जरूरत है।
उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड
उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में सुबह तथा रात के समय ठंड का असर बढ़ने लगा है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का प्रभाव मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, इन क्षेत्रों में चक्रवात का प्रभाव स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
मछुआरों और तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह
संभावित खराब मौसम को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना चाहिए। मछुआरों को समुद्र में जाने से संबंधित जारी निर्देशों का पालन करने, तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और बिजली के खंभों तथा कमजोर पेड़ों के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग के अगले बुलेटिन के आधार पर चक्रवात की दिशा, गति और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति में बदलाव हो सकता है। इसलिए लोगों को अफवाहों से बचते हुए आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।
स्रोत: मौसम संबंधी प्रकाशित रिपोर्टें एवं भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान का समाचारों में उल्लेख।

