रांची। खनिज संसाधनों पर सेस वसूली से जुड़े नए केंद्रीय कानून को लेकर झारखंड सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने विरोध जताया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार इस कानून के प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज करा रही है, जबकि JMM ने इसके विरोध में राज्यभर में आंदोलन की घोषणा की है।
JMM के अनुसार, नए कानून के प्रावधानों से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ करों और सेस पर केंद्र की शर्तें लागू होंगी। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, संशोधन में राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कुछ प्रकार के कर, सेस या अन्य शुल्क लगाने पर प्रतिबंध का प्रावधान है, हालांकि केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत इसकी अनुमति का रास्ता रखा गया है।
झामुमो ने इस मुद्दे को राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और राजस्व से जुड़े अधिकारों से जोड़ते हुए आंदोलन की घोषणा की है। पार्टी की ओर से शनिवार को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। पार्टी नेताओं ने आंदोलन के दौरान ‘जल, जंगल और जमीन’ से जुड़े मुद्दे को भी उठाने की बात कही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे पहले केंद्र सरकार से संशोधित खनिज कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उनके अनुसार, खनिज से होने वाला राजस्व झारखंड के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, केंद्र के कानून के समर्थक पक्ष का तर्क है कि संशोधन का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में कर व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाना और राष्ट्रीय स्तर पर नियमन को मजबूत करना है।
मामले में केंद्र और झारखंड सरकार के बीच राज्यों के अधिकार, खनिज राजस्व और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। आगे इस विषय पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

