रानी बाजार। माधव सर्वोदय पीजी कॉलेज में आयोजित एनसीसी संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर-73 (CATC-73) के पांचवें दिन कैडेटों को सैन्य प्रशिक्षण, हथियार संचालन, मानचित्र अध्ययन, साक्षात्कार कौशल और संवाद कला का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर का संचालन कैंप कमांडेंट कर्नल ज्ञान प्रकाश पांडेय और डिप्टी कैंप कमांडेंट कर्नल यू. एन. पांडेय के निर्देशन में किया जा रहा है।
ड्रिल और फायरिंग का मिला प्रशिक्षण
शिविर के पांचवें दिन की शुरुआत पीआई स्टाफ की ओर से कराए गए अनुशासित ड्रिल अभ्यास से हुई। इसके बाद शॉर्ट रेंज पर जीसीआई नीति सिंह की मौजूदगी में हवलदार जगनंदन ने फायरिंग का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान कैडेटों को निशानेबाजी के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया।
इसके बाद हवलदार कमल ने मानचित्र अध्ययन (मैप रीडिंग) का सत्र संचालित किया। इसमें कैडेटों को मानचित्र सेट करने, नक्शे पर अपनी स्थिति पहचानने और सेक्शन फॉर्मेशन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां दी गईं।
स्वच्छता निरीक्षण और व्यक्तित्व विकास पर जोर
शिविर में अनुशासन और स्वच्छता व्यवस्था का जायजा लेने के लिए कैंप एडजूटेंट मेजर के. पी. सिंह, कैप्टन डॉ. हरीश कुमार सिंह, लेफ्टिनेंट जितेंद्र जायसवाल, सेकंड ऑफिसर सुरेंद्र वर्मा, सूबेदार प्रभाकर सिंह और जीसीए वंदिनी विश्वकर्मा ने लाइन एरिया के ले-आउट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कैडेटों को व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ शिविर परिसर को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित किया।
साक्षात्कार और संवाद कौशल की दी जानकारी
बौद्धिक प्रशिक्षण सत्र में कैप्टन डॉ. हरीश सिंह ने कैडेटों को साक्षात्कार कौशल के बारे में जानकारी दी। वहीं, मेजर के. पी. सिंह ने संवाद कौशल और समूह चर्चा (ग्रुप डिस्कशन) पर विशेष कक्षा ली। उन्होंने कैडेटों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने, प्रभावी संवाद करने और समूह में अपने विचार प्रस्तुत करने के तरीके बताए।
खेल प्रतियोगिताओं में कैडेटों ने दिखाया उत्साह
सायंकालीन सत्र में सूबेदार मेजर बहादुर सिंह के निर्देशन में खेल प्रभारी सीटीओ रामबाबू ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराईं। वॉलीबॉल, रस्साकसी और खो-खो के मुकाबलों में कैडेटों ने उत्साह के साथ भाग लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान कैडेटों ने खेल भावना, अनुशासन और टीम वर्क का प्रदर्शन किया।
शिविर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में ऑनरेरी कैप्टन राज नारायण सिंह, सूबेदार प्रभाकर सिंह, सूबेदार खेम बहादुर, हवलदार कमल और बीएचएम लखविंदर सिंह का विशेष सहयोग रहा।

