नई दिल्ली। दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने और ट्रेनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद रहे और रेल सेवाओं पर भी पाबंदियां जारी रहीं।
45 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने पर उठाए सवाल
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने का फैसला जारी रखा। याचिका के अनुसार, इससे यात्रियों को परेशानी हुई और राजधानी में आम जनजीवन प्रभावित हुआ। याचिकाकर्ता ने कुछ मेट्रो स्टेशनों के बंद प्रवेश द्वारों का निरीक्षण करने और वीडियो रिकॉर्डिंग करने का भी दावा किया है।
9 अक्टूबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
याचिका में 9 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का हवाला दिया गया है। अदालत ने CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उन्हें उचित तरीके से नियंत्रित कर संचालित करने पर विचार करने को कहा था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि यात्रियों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए परिवहन व्यवस्था से संबंधित जानकारी का व्यापक प्रचार किया जाए।
अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC की अध्यक्ष डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए हैं; अवमानना के संबंध में अदालत का अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है।

