लार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लार में बायोकेमेस्ट्री जांच की सिलेक्ट्रा मशीन पिछले करीब एक सप्ताह से खराब होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन करीब 250 से 350 मरीजों की ओपीडी वाले अस्पताल में मशीन खराब होने से एलएफटी और केएफटी समेत कई महत्वपूर्ण जांच प्रभावित हैं। ऐसे में जांच कराने पहुंचे मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल पहुंचे मरीजों और तीमारदारों का आरोप है कि मशीन खराब होने के बावजूद इसे ठीक कराने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनका आरोप है कि बुखार जैसी सामान्य बीमारी में भी कई जांच बाहर से कराने की सलाह दी जाती है और इसके बाद कुछ मरीजों को देवरिया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
कुछ मरीजों और ग्रामीणों ने अस्पताल में चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई चिकित्सक बाहर से आते-जाते हैं और परिसर में नहीं रुकते, जिससे जरूरत के समय मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा मिलने में परेशानी होती है।
वहीं, लैब टेक्नीशियन चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि तकनीकी खराबी के कारण बायोकेमेस्ट्री की सिलेक्ट्रा मशीन काम नहीं कर रही है। मशीन खराब होने से एलएफटी और केएफटी जैसी जांचें प्रभावित हैं। हालांकि सीबीसी, एमपी, वीडाल और ब्लड ग्रुप की जांच नियमित रूप से की जा रही है।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि मशीन की तकनीकी खराबी दूर कराने के लिए टेक्नीशियन को बुलाया गया है। जल्द ही मशीन को ठीक करा दिया जाएगा, जिससे मरीजों को हो रही परेशानी दूर हो सकेगी।

