लखनऊ। घर बनवाते समय रसोई की योजना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। रसोई घर का ऐसा हिस्सा है जिसका इस्तेमाल रोजाना किया जाता है। यहां भोजन तैयार करने से लेकर पानी, गैस और बिजली से जुड़े कई काम होते हैं। वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं में भी रसोई की दिशा और उसके भीतर गैस चूल्हे, सिंक, फ्रिज तथा अन्य सामान की स्थिति को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक रूप से निश्चित परिणाम सिद्ध नहीं है।
रसोई के लिए किस दिशा को माना जाता है उपयुक्त?
वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार घर की दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका संबंध अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है।
यदि किसी कारण से दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई बनाना संभव न हो तो कुछ वास्तु परंपराओं में उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण को दूसरा विकल्प माना जाता है।
हालांकि घर का नक्शा तैयार करते समय केवल वास्तु दिशा ही नहीं, बल्कि वेंटिलेशन, धुएं की निकासी, गैस पाइपलाइन, बिजली के कनेक्शन और सुरक्षा जैसे व्यावहारिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
गैस चूल्हे की जगह पर दें विशेष ध्यान
वास्तु मान्यताओं के अनुसार रसोई में गैस चूल्हे को अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है। इसलिए इसे दक्षिण-पूर्व हिस्से में रखने की सलाह दी जाती है।
चूल्हे की स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि खाना बनाते समय व्यक्ति के पीछे सीधे दरवाजा या आने-जाने का रास्ता न हो। साथ ही चूल्हे और दीवार के बीच पर्याप्त दूरी तथा आसपास सुरक्षित जगह होना जरूरी है।
व्यावहारिक रूप से गैस चूल्हे के पास ज्वलनशील सामान नहीं रखना चाहिए और गैस सिलेंडर, पाइप तथा रेगुलेटर की नियमित जांच करनी चाहिए।
सिंक और गैस चूल्हे के बीच दूरी क्यों जरूरी?
रसोई में गैस और सिंक दोनों महत्वपूर्ण हिस्से हैं। वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में अग्नि और जल तत्व को अलग रखने की बात कही जाती है। इसी वजह से चूल्हे और सिंक को बिल्कुल पास-पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
व्यावहारिक दृष्टि से भी दोनों के बीच कुछ दूरी रखना सुविधाजनक होता है। इससे खाना बनाने, बर्तन धोने और रसोई में काम करने के लिए पर्याप्त काउंटर स्पेस मिलता है।
सिंक किस दिशा में रखा जाए?
वास्तु से जुड़े कई मतों में रसोई के सिंक और पानी से संबंधित स्थान के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा को प्राथमिकता दी जाती है।
लेकिन किसी भी घर में सिंक की स्थिति तय करते समय पानी की पाइपलाइन, ड्रेनेज और काउंटर की उपयोगिता को भी ध्यान में रखना चाहिए। गलत ढलान या खराब जल निकासी के कारण रसोई में पानी जमा हो सकता है और इससे फर्श, कैबिनेट तथा दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है।
फ्रिज कहां रखें?
वास्तु के अलग-अलग मतों में फ्रिज की स्थिति को लेकर अलग-अलग सुझाव मिलते हैं। सामान्य तौर पर इसे रसोई के ऐसे हिस्से में रखना उचित है जहां दरवाजा आसानी से खुले और चूल्हे से पर्याप्त दूरी बनी रहे।
फ्रिज को गैस चूल्हे के बिल्कुल पास रखने से बचना व्यावहारिक रूप से भी बेहतर है, क्योंकि दोनों उपकरणों की गर्मी और उपयोग की प्रकृति अलग होती है।
रसोई में खिड़की और वेंटिलेशन जरूरी
रसोई बनवाते समय प्राकृतिक रोशनी और हवा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाना पकाते समय निकलने वाला धुआं और गर्म हवा बाहर निकल सके, इसके लिए खिड़की, एग्जॉस्ट फैन या चिमनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
यह केवल वास्तु की दृष्टि से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और घर की स्वच्छता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
रसोई में रंगों का चुनाव
वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में रसोई के लिए हल्के और गर्म रंगों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। नारंगी, हल्का पीला, क्रीम और हल्के भूरे जैसे रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि रंग का चुनाव घर की डिजाइन, रोशनी और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार करना भी पूरी तरह उचित है।
रसोई में इन बातों से बचें
रसोई को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने के लिए कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- गैस चूल्हे के पास कपड़े या अन्य ज्वलनशील सामान न रखें।
- गैस पाइप और रेगुलेटर की समय-समय पर जांच करें।
- सिंक के आसपास पानी जमा न होने दें।
- चिमनी और एग्जॉस्ट की नियमित सफाई करें।
- बिजली के उपकरणों को पानी के सीधे संपर्क से दूर रखें।
- रसोई में पर्याप्त रोशनी रखें।
- भारी सामान रखने के लिए मजबूत कैबिनेट का इस्तेमाल करें।
- रसोई का रास्ता सामान रखकर बंद न करें।
रसोई बनवाते समय वास्तु के साथ इन बातों को भी रखें ध्यान
घर बनवाते समय वास्तु संबंधी मान्यताओं का पालन करना चाहते हैं तो उन्हें भवन की वास्तविक जरूरतों के साथ संतुलित करना उपयोगी है। रसोई की योजना बनाते समय सुरक्षा, पर्याप्त वेंटिलेशन, प्राकृतिक रोशनी, पानी की निकासी, गैस कनेक्शन, विद्युत सुरक्षा और काम करने की सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
निष्कर्ष
वास्तु शास्त्र में रसोई को अग्नि तत्व से जोड़कर देखा जाता है और दक्षिण-पूर्व दिशा को पारंपरिक रूप से इसके लिए महत्वपूर्ण माना गया है। गैस चूल्हे और सिंक को अलग-अलग स्थान पर रखने, पर्याप्त दूरी बनाए रखने तथा रसोई में रोशनी और वेंटिलेशन की व्यवस्था करने की सलाह दी जाती है।
हालांकि वास्तु संबंधी सुझाव पारंपरिक मान्यताएं हैं। घर की रसोई तैयार करते समय इन बातों के साथ-साथ वास्तु विशेषज्ञ, आर्किटेक्ट और संबंधित सुरक्षा मानकों की सलाह को भी ध्यान में रखना चाहिए।

