लखनऊ। घर बनवाते समय लोग नक्शे, कमरों की स्थिति, रोशनी और हवा के साथ-साथ वास्तु से जुड़ी बातों पर भी ध्यान देते हैं। वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि मुख्य द्वार घर में प्रवेश का प्रमुख मार्ग होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का स्थान भी है। हालांकि वास्तु से जुड़ी ये बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इनके प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
मुख्य द्वार की दिशा को क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?
वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और मुख्य प्रवेश द्वार की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पारंपरिक वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशा की ओर खुलने वाले मुख्य द्वार को शुभ माना जाता है। वहीं पश्चिम और दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार होने पर भी वास्तु के अनुसार उसके सही स्थान और घर की पूरी संरचना को ध्यान में रखना जरूरी माना जाता है।
इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं माना जाता कि दरवाजा किस दिशा में है, बल्कि उस दिशा में दरवाजे की वास्तविक स्थिति, आसपास की संरचना और घर के नक्शे को भी देखा जाता है।
मुख्य द्वार के सामने क्या होना चाहिए?
वास्तु की मान्यताओं के अनुसार मुख्य दरवाजे के सामने अनावश्यक अवरोध नहीं होना चाहिए। प्रवेश क्षेत्र खुला, साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। दरवाजे के ठीक सामने कूड़ादान, अत्यधिक कबाड़ या ऐसी वस्तुएं रखने से बचने की सलाह दी जाती है जो आने-जाने में बाधा बनें।
व्यावहारिक रूप से भी साफ-सुथरा प्रवेश द्वार घर की पहली छवि को बेहतर बनाता है और आने-जाने में सुविधा देता है।
मुख्य दरवाजा कैसा हो?
वास्तु संबंधी मान्यताओं में मुख्य द्वार को मजबूत, साफ और अच्छी स्थिति में रखने पर जोर दिया जाता है। दरवाजे में टूट-फूट, खराब कुंडी या अनावश्यक आवाज होने पर उसे ठीक कराने की सलाह दी जाती है।
दरवाजे के आसपास पर्याप्त रोशनी रखना भी उपयोगी है। रात में पर्याप्त प्रकाश सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।
मुख्य द्वार के पास सफाई का रखें ध्यान
घर का प्रवेश द्वार सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले हिस्सों में से एक है। इसलिए यहां नियमित सफाई जरूरी है। जूते-चप्पल व्यवस्थित रखने, कूड़ा जमा न होने देने और रास्ता खुला रखने से प्रवेश क्षेत्र अधिक सुविधाजनक रहता है।
वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में भी मुख्य द्वार को साफ और व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।
दरवाजे के सामने शीशा लगाना सही है?
वास्तु से जुड़े कुछ मतों में मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ा दर्पण लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे अलग-अलग पारंपरिक तर्क दिए जाते हैं। हालांकि घर में दर्पण कहां लगाया जाए, इसका निर्णय कमरे की उपयोगिता, प्रकाश और व्यक्तिगत पसंद के आधार पर भी किया जा सकता है।
नाम प्लेट और रोशनी का भी रखें ध्यान
मुख्य द्वार के पास घर की नाम प्लेट लगाना आज सामान्य चलन है। इसे ऐसी जगह लगाया जा सकता है जहां वह आसानी से दिखाई दे और दरवाजे के खुलने-बंद होने में परेशानी न हो। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी भी जरूरी है। इससे रात में दरवाजे, सीढ़ियों और आसपास के क्षेत्र को देखने में सुविधा होती है।
पौधे कहां लगाएं?
कई वास्तु मान्यताओं में घर के प्रवेश क्षेत्र में पौधे लगाने को सकारात्मक माना जाता है। लेकिन पौधों का चयन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी जड़ें भवन की नींव को नुकसान न पहुंचाएं और उनकी शाखाएं रास्ते या दरवाजे को बाधित न करें।
छोटे सजावटी पौधे प्रवेश क्षेत्र को आकर्षक बना सकते हैं, बशर्ते वे आने-जाने में बाधा न बनें।
दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार हो तो क्या करें?
यदि किसी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो केवल दिशा के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। वास्तु शास्त्र में भी किसी घर का मूल्यांकन केवल एक दरवाजे की दिशा देखकर नहीं किया जाता। कमरे, रसोई, पूजा स्थल, सीढ़ियां, खिड़कियां और पूरे भवन की संरचना को ध्यान में रखकर विचार किया जाता है।
इसलिए नया घर बनाते समय वास्तु मान्यताओं को ध्यान में रखना चाहते हैं तो पूरे नक्शे का समग्र अध्ययन करना अधिक उचित माना जाता है।
घर बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मुख्य द्वार से जुड़ी वास्तु मान्यताओं पर ध्यान देने के साथ-साथ कुछ व्यावहारिक बातों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है—
- प्रवेश द्वार सुरक्षित और मजबूत हो।
- दरवाजे के सामने आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह हो।
- प्रवेश मार्ग पर पर्याप्त रोशनी हो।
- बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो।
- दरवाजे के आसपास सीलन और पानी जमा न होने दें।
- बिजली के तार या अन्य जोखिम वाली वस्तुएं प्रवेश मार्ग से दूर रखें।
- घर का मुख्य प्रवेश मार्ग साफ और व्यवस्थित रखें।
निष्कर्ष
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है और इसकी दिशा, स्थिति तथा आसपास की व्यवस्था को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पूर्व और उत्तर दिशा को लेकर विशेष मान्यताएं मिलती हैं, लेकिन किसी भी घर की योजना बनाते समय केवल वास्तु के आधार पर निर्णय लेने के बजाय सुरक्षा, प्राकृतिक रोशनी, वेंटिलेशन, जल निकासी, उपयोगिता और स्थानीय भवन नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

