देवरिया ‘गुरु तेग बहादुर न होते तो हिन्दुआनी न होती, गुरु तेग बहादुर ने अपना बलिदान देकर सनातन धर्म, हिन्दू धर्म और मानवता को बचा लिया। इसीलिए उन्हें कहा जाता है गुरु तेग बहादुर–हिन्द की चादर।’ उक्त बातें अपने सम्बोधन में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार समन्वय समिति एवं सोशल मीडिया पत्रकार महासंघ के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार दिलावर सिंह ने अपने मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए कहीं। वे विवेकानंद विद्यापीठ महूजा में गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि उस समय औरंगजेब का शासन था और वह तलवार के बल पर हिन्दुओं पर बर्बर अत्याचार कर रहा था। उसने अपने सैनिकों को आदेश दे रखा था कि सब हिन्दुओं को मुसलमान बनाओ और जो न बने उसका कत्ल कर दो। उसने कश्मीर के ब्राह्मणों पर भी धर्म परिवर्तन के लिए भीषण अत्याचार किए। ब्राह्मणों पर औरंगजेब के अत्याचारों से मुक्ति के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया। दिल्ली में जहां इनका बलिदान हुआ वहीं आज शीशगंज गुरुद्वारा है। गुरु तेग बहादुर के इस बलिदान का सम्पूर्ण हिन्दू व सनातन ऋणी है। इस अवसर पर विवेकानंद विद्यापीठ के संस्थापक प्रोफेसर डॉक्टर दयाशंकर पाण्डेय ने भी गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर प्रकाश डाला।



