संतकबीरनगर, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश द्वारा निजीकरण के विरोध में चल रहा सात दिवसीय क्रमिक अनशन आज प्रातः 10 बजे संपन्न हो गया। समिति ने देश की सीमाओं पर युद्ध जैसी गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आगामी 14 मई तक किसी भी प्रकार के आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी इं. राजेश कुमार ने कहा कि सीमाओं की मौजूदा संवेदनशील स्थिति को देखते हुए समिति ने यह निर्णय देशहित में लिया है। उन्होंने प्रबंधन से भी अपील की कि वह निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करे ताकि एक शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक कार्य वातावरण तैयार किया जा सके।
इं. मुकेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यदि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाता है, तो बिजली कर्मचारी और अभियंता पूरी जिम्मेदारी के साथ सहयोग करेंगे और युद्धकाल में भीषण गर्मी के बावजूद निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
02 मई से शुरू हुए इस क्रमिक अनशन में प्रतिदिन लगभग 1000 से अधिक बिजली कर्मचारी व अभियंता शामिल हुए और समर्थन में 2000 से अधिक कर्मियों ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के इस आंदोलन को उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों के बिजली कर्मचारियों का भी समर्थन मिला।
7 मई को अनशनकारियों ने तिरंगा रैली निकाली और आज राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए अनशन का समापन किया।
आज संतकबीर नगर में आयोजित विरोध सभा में धीरेंद्र यादव, सुनील प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, संजय यादव, आशीष कुमार सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।