नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा के मतदाता सूची से नाम हटने के दावे के बाद अब इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्षी दल जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष की ओर से राघव चड्ढा पर ही पलटवार किया जा रहा है।
‘नाम गायब होने पर खुद जिम्मेदार’
SIR घटनाक्रम को लेकर सामने आए राजनीतिक बयान में राघव चड्ढा से कहा गया कि यदि मतदाता सूची में उनका नाम गायब हुआ है तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार हैं। साथ ही उनसे करीब 20 लाख मतदाताओं के नामों को लेकर भी आवाज उठाने की मांग की गई।
आरोप लगाया गया कि किसी एक नेता के नाम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करने के बजाय उन सभी मतदाताओं के अधिकारों की बात होनी चाहिए, जिनके नाम पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रभावित हुए हैं।
SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही मतभेद हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने के लिए पुनरीक्षण जरूरी है।
राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते विवाद के बीच अब राघव चड्ढा के नाम को लेकर सामने आया घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
20 लाख मतदाताओं का मुद्दा बना केंद्र
पूरे विवाद में अब 20 लाख मतदाताओं का आंकड़ा भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दल इसे मतदाता अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि दूसरी ओर प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर राजनीतिक जवाब दिए जा रहे हैं।
SIR को लेकर जारी विवाद में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मतदाता सूची में नामों के सत्यापन और आपत्तियों के निस्तारण को लेकर चुनाव आयोग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

