सिकंदराबाद आर्मरी चोरी केस में बड़ा खुलासा, अंदर के ही शख्स की भूमिका की पुष्टि; अधिकांश हथियार ट्रेस

हैदराबाद। तेलंगाना के सिकंदराबाद कैंटोनमेंट स्थित मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से हथियार चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इस सनसनीखेज चोरी में अंदर के किसी व्यक्ति की भूमिका रही है। अधिकारियों के मुताबिक चोरी किए गए अधिकांश हथियारों को ट्रेस कर लिया गया है। मामले की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि हथियारों की चोरी में किसने मदद की और सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह भेदा गया।

12 हथियारों के गायब होने से मचा था हड़कंप

सिकंदराबाद कैंटोनमेंट के बोलारम इलाके में स्थित मद्रास रेजिमेंट की आर्मरी से 12 हथियार गायब होने का मामला 31 अगस्त को सामने आया था। इनमें AK-203 असॉल्ट राइफलें, पिस्तौल और INSAS राइफल शामिल थीं। हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण भी गायब पाए गए थे।

अधिकारियों को आर्मरी के ताले और हथियारों के भंडारण वाले बक्से टूटे मिले थे। शुरुआती तौर पर आशंका जताई गई थी कि चोरी 30 अगस्त की रात हुई होगी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर इस समय-सीमा को लेकर भी सवाल उठे।

बाहर के व्यक्ति के लिए आसान नहीं थी आर्मरी तक पहुंच

आर्मरी अत्यधिक सुरक्षा वाले सैन्य परिसर में स्थित है। यहां आम लोगों की आवाजाही नहीं होती। ऐसे में जांच एजेंसियों ने शुरुआत से ही यह संभावना तलाशनी शुरू कर दी थी कि चोरी में किसी ऐसे व्यक्ति की मदद ली गई हो, जिसे परिसर और हथियारों के भंडारण की जानकारी थी।

जांच के दौरान सुरक्षाकर्मियों, हथियारों तक अधिकृत पहुंच रखने वाले कर्मचारियों और संबंधित सैन्य कर्मियों से पूछताछ की गई। पुलिस और सैन्य खुफिया एजेंसियों ने CCTV फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और हथियारों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की।

अब जांच में अंदर के व्यक्ति की भूमिका सामने आई

ताजा जांच में अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला है कि यह घटना इंसाइडर जॉब थी। यानी चोरी को अंजाम देने वालों को सैन्य परिसर और आर्मरी की व्यवस्था की अंदरूनी जानकारी थी या उन्हें अंदर से सहायता मिली थी।

हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि अंदर से मदद करने वाला व्यक्ति कौन है या उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इस संबंध में पूछताछ और जांच जारी है।

अधिकांश हथियार ट्रेस किए गए

पुलिस के मुताबिक चोरी किए गए अधिकांश हथियारों को ट्रेस कर लिया गया है। इससे जांच एजेंसियों को मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। हथियारों की बरामदगी और चोरी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की भी है कि हथियार चोरी के बाद कहां ले जाए गए और उन्हें किसे सौंपा जाना था।

हथियारों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने सेना की अत्यधिक सुरक्षित मानी जाने वाली आर्मरी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच के दौरान हथियारों के रिकॉर्ड और रजिस्टर के रखरखाव को लेकर भी सवाल सामने आए थे।

एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, आर्मरी से जुड़े रिकॉर्ड कुछ समय से नियमित रूप से अपडेट नहीं किए गए थे। इससे यह पता लगाने में भी मुश्किल हुई कि हथियार वास्तव में किस समय गायब हुए।

सेना और पुलिस अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया है।

पहले चार सैन्यकर्मी जांच के घेरे में आए थे

जांच के शुरुआती चरण में करीब 10 सैन्य कर्मियों से पूछताछ के बाद चार लोगों को प्रमुख संदिग्धों के रूप में चिन्हित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। बाद में जांच का दायरा बढ़ाकर वरिष्ठ अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारियों तक किया गया।

इससे स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां केवल चोरी करने वाले व्यक्ति की तलाश नहीं कर रहीं, बल्कि यह भी पता लगा रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई।

मामले में आगे क्या होगा?

अब जांच एजेंसियों के सामने मुख्य सवाल हैं—

  • आर्मरी से हथियारों को किसने बाहर निकाला?
  • अंदर से किस व्यक्ति ने मदद की?
  • चोरी किए गए हथियारों को कहां ले जाया गया?
  • क्या इस घटना के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था?
  • हथियारों की सुरक्षा और रिकॉर्ड व्यवस्था में कहां चूक हुई?

अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश हथियारों का पता चलना जांच के लिए बड़ी सफलता है। हालांकि पूरे घटनाक्रम और जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर आधिकारिक जांच अभी जारी है।

सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा

सिकंदराबाद कैंटोनमेंट की इस घटना के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों में हथियारों की सुरक्षा, रिकॉर्ड प्रबंधन और अधिकृत प्रवेश व्यवस्था की समीक्षा महत्वपूर्ण हो गई है। जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा में हुई कमियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाने की संभावना है।

फिलहाल पुलिस और सैन्य एजेंसियों का ध्यान चोरी में शामिल लोगों की पहचान, हथियारों की पूरी बरामदगी और इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है।

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