नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन के बीच देश के लिए एक अहम आर्थिक चुनौती भी सामने आई है। BRICS के सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही आयात और निर्यात के बीच का अंतर भी लगातार चौड़ा हुआ है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत का अन्य BRICS देशों के साथ वस्तु व्यापार घाटा करीब 224 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार यह घाटा 226.1 अरब डॉलर रहा।
पांच साल में दोगुने से ज्यादा हुआ कारोबार
BRICS देशों के साथ भारत का कुल व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत और बाकी BRICS देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 416 अरब डॉलर रहा।
2021 में यह आंकड़ा लगभग 203 अरब डॉलर था। यानी पांच वर्षों में व्यापार का आकार दोगुने से भी अधिक हो गया। लेकिन समस्या यह है कि व्यापार बढ़ने के साथ भारत के आयात में निर्यात की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी आई।
आयात तेजी से बढ़ा, निर्यात पीछे रहा
वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच BRICS देशों को भारत का निर्यात लगभग 64.3 अरब डॉलर से बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हुआ। दूसरी ओर आयात करीब 138.8 अरब डॉलर से बढ़कर 321.8 अरब डॉलर पहुंच गया।
इसका सीधा असर व्यापार संतुलन पर पड़ा और घाटा करीब 74.5 अरब डॉलर से बढ़कर 226.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
चीन सबसे बड़ा व्यापार घाटा देने वाला देश
भारत के BRICS व्यापार में चीन सबसे बड़ा चिंता का विषय बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से भारत का आयात करीब 131.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे चीन भारत के लिए सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा।
चीन से भारत मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और कई औद्योगिक उत्पाद आयात करता है। दूसरी ओर भारत की ओर से चीन को होने वाले निर्यात की गति उतनी तेज नहीं रही है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है।
रूस से भी आयात का दबाव
रूस BRICS में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, लेकिन व्यापार के मोर्चे पर तस्वीर अलग है। रूस से भारत की खरीद में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की बड़ी भूमिका है। इसके अलावा उर्वरक जैसे उत्पादों का आयात भी महत्वपूर्ण है।
इस वजह से रूस के साथ भारत का व्यापार बढ़ा है, लेकिन आयात का स्तर निर्यात से काफी अधिक रहने के कारण यहां भी भारत को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है।
UAE और अन्य BRICS देशों से भी असंतुलन
BRICS के विस्तार के बाद भारत के आर्थिक संबंध चीन और रूस तक सीमित नहीं हैं। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी समूह का हिस्सा हैं।
कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत को चीन, रूस, सऊदी अरब, UAE और इंडोनेशिया के साथ व्यापार घाटा हुआ। वहीं ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत का व्यापार अपेक्षाकृत संतुलित रहा।
भारत के लिए चुनौती क्या है?
BRICS को भारत आर्थिक सहयोग और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में देखता है। लेकिन बढ़ता व्यापार घाटा बताता है कि केवल व्यापार की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि BRICS देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़े।
भारत के लिए खासतौर पर इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाएं, कृषि उत्पाद, खाद्य सामग्री, सेवाएं और तकनीकी उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की संभावनाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
BRICS सम्मेलन में उठ सकता है व्यापार संतुलन का मुद्दा
नई दिल्ली में हो रहे BRICS सम्मेलन में आर्थिक सहयोग और व्यापार प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। ऐसे में भारत के लिए सदस्य देशों के साथ व्यापार में असंतुलन कम करने की रणनीति पर जोर देना महत्वपूर्ण होगा।
भारत चाहता है कि BRICS देशों के बीच व्यापारिक संबंध केवल आयात पर आधारित न रहें, बल्कि सदस्य देशों के बीच बाजार पहुंच, निवेश और निर्यात के अवसर भी बढ़ें।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश
BRICS में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की चर्चा भी चल रही है। भारत और रूस ने सीमा-पार डिजिटल भुगतान के लिए नई व्यवस्था पर काम करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
हालांकि भुगतान व्यवस्था में बदलाव अपने आप व्यापार घाटे की समस्या हल नहीं करेगा। इसके लिए भारत को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धी निर्यात तैयार करने और BRICS बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
बड़ा बाजार, लेकिन भारत के लिए बड़ा सवाल
BRICS आज वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समूह है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार BRICS देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत GDP और 25 प्रतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऐसे विशाल बाजार में भारत के लिए निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं काफी बड़ी हैं। लेकिन मौजूदा आंकड़े यह भी बताते हैं कि BRICS के साथ व्यापार बढ़ने के बावजूद भारत का आयात तेजी से बढ़ रहा है।
इसलिए भारत के सामने अब दोहरी चुनौती है—BRICS के साथ व्यापार को और बढ़ाना और साथ ही व्यापार घाटे को नियंत्रित करना। नई दिल्ली में हो रहा शिखर सम्मेलन इस दिशा में भारत की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

