नई दिल्ली। ऑनलाइन खरीदारी और फूड डिलीवरी के बढ़ते चलन के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ई-कॉमर्स कंपनियों को सख्त संदेश दिया है। खाद्य पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री और डिलीवरी से जुड़ी कंपनियां अब खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जिम्मेदारी से यह कहकर बच नहीं सकतीं कि वे केवल सामान की डिलीवरी करती हैं।
FSSAI ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और फूड डिलीवरी से जुड़े कारोबारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले खाद्य उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।
‘सिर्फ डिलीवरी करते हैं’ कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से खाद्य पदार्थों की बिक्री में कई पक्ष शामिल होते हैं। इसमें निर्माता, विक्रेता, रेस्टोरेंट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और डिलीवरी एजेंसियां शामिल हो सकती हैं।
FSSAI का जोर इस बात पर है कि खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल खाद्य पदार्थ बनाने वाले या बेचने वाले तक सीमित नहीं मानी जा सकती। जिस प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता तक खाद्य उत्पाद पहुंच रहा है, उसे भी लागू नियमों और अपनी भूमिका के अनुसार जरूरी अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर नजर
ई-कॉमर्स के जरिए किराना सामान, पैकेज्ड फूड, डेयरी उत्पाद, स्नैक्स और अन्य खाद्य सामग्री की खरीदारी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में ऑनलाइन उपलब्ध खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, लेबलिंग, पैकेजिंग, एक्सपायरी डेट और भंडारण की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है।
खाद्य सुरक्षा नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को ऐसा खाद्य उत्पाद मिले जो सुरक्षित हो और जिसके बारे में पैकेज पर दी गई जानकारी सही हो।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को करनी होगी जरूरी जांच
FSSAI की सख्ती का असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो अपने प्लेटफॉर्म के जरिए खाद्य उत्पादों की बिक्री या डिलीवरी कराती हैं। प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करने के लिए अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले उत्पाद या विक्रेता उपभोक्ताओं तक न पहुंचें।
खाद्य कारोबारियों के लिए लाइसेंस और पंजीकरण की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कारोबार करने वाले संबंधित खाद्य व्यवसायों के नियामकीय अनुपालन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
FSSAI की कार्रवाई और सख्ती का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है। ऑनलाइन खाद्य पदार्थ खरीदते समय ग्राहकों को भी उत्पाद की एक्सपायरी डेट, पैकेजिंग, FSSAI लाइसेंस/पंजीकरण संबंधी जानकारी और लेबल जरूर देखना चाहिए।
यदि किसी ग्राहक को खराब, संदिग्ध या नियमों के विपरीत खाद्य उत्पाद मिलता है तो वह संबंधित प्लेटफॉर्म के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत कर सकता है।
फूड डिलीवरी का कारोबार तेजी से बढ़ा
भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स के विस्तार ने खाद्य उत्पादों की खरीद और डिलीवरी का तरीका बदल दिया है। कुछ ही मिनटों में किराना और खाने-पीने की वस्तुएं घर पहुंचने लगी हैं।
इस बदलते कारोबारी मॉडल के बीच नियामक संस्थाओं के सामने यह चुनौती भी है कि खाद्य सुरक्षा के पुराने नियमों को डिजिटल और प्लेटफॉर्म आधारित कारोबार के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
नियमों का पालन नहीं करने पर हो सकती है कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबारी या अन्य जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए खाद्य सुरक्षा अनुपालन को केवल विक्रेता की जिम्मेदारी मानकर छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है।
FSSAI का स्पष्ट संदेश है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खाद्य पदार्थ उपभोक्ता तक पहुंच रहे हैं तो खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
उपभोक्ताओं को भी रहना होगा सतर्क
ऑनलाइन खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल कीमत और डिलीवरी टाइम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। उत्पाद की पैकेजिंग, निर्माण और समाप्ति तिथि, लेबल पर दी गई जानकारी तथा विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच करना भी जरूरी है।
FSSAI की यह सख्ती ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब देश में ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स के माध्यम से खाद्य पदार्थों की बिक्री लगातार बढ़ रही है।

