जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है महारास: पंडित मृगेंद्र शांडिल्य !

क्षेत्र के ग्राम सवरेजी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का दिव्य वर्णन सुना. कथावाचक पंडित मृगेंद्र शांडिल्य ने अपने प्रवचन में श्री कृष्ण के रास लीला के गूढ़ अर्थों को स्पष्ट करते हुए भक्तों को अध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी. उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया. इस अवसर पर भगवान ने अपनी दिव्य बासुरी बजाई, जिसका स्वर केवल गोपियों ने सुना. जब गोपियां बासुरी की आवाज सुनकर अपने कार्यों को छोड़कर भगवान के पास पहुंची और रास लीला शुरू हुई, तब गोपियों को सौंदर्य का अभिमान हो गया. इस कारण भगवान श्री कृष्ण अंतर्ध्यान हो गए. तब गोपियां भगवान के दर्शन के लिए गोपी गीत गाने लगीं और रोने लगीं, जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण पुनः प्रकट हुए और रास लीला की. उन्होंने आगे बताया कि रास और महारास के बीच अंतर है.

रास वह स्थिति है जब भक्त भगवान से मिलने की इच्छा रखते हैं, जबकि महारास उस स्थिति को कहा जाता है जब भगवान स्वयं अपने भक्तों से मिलने के लिए आते हैं. पंडित मृगेंद्र शांडिल्य ने इसे जीवात्मा और परमात्मा के मिलन के रूप में समझाया. कथा के दौरान उन्होंने कंस के अत्याचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कैसे कंस ने भगवान श्री कृष्ण को मारने के लिए अक्रूर जी को गोकुल भेजा, लेकिन जब भगवान श्री कृष्ण मथुरा की ओर प्रस्थान करने लगे, तो गोपियां अत्यधिक शोकित हो उठीं. भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह फिर कभी लौटकर आएंगे, लेकिन वह कभी नहीं लौटे. मथुरा पहुंचकर भगवान ने कंस का वध किया और उसे परमगति प्रदान की. कथा के दौरान बीच-बीच में गायक सिद्धार्थ मणि के द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया। कथा में प्रमुख रूप से मुख्य यजमान सुरेश तिवारी, अजय तिवारी, विजय तिवारी, संदीप, विकास तिवारी, आशुतोष, ज्ञानेंद्र, पंडित गंगेश्वर नाथ तिवारी, मनीष गुप्ता, परशुराम तिवारी, मोहन गुप्ता, लक्ष्मण पटेल, सुनील पटेल, बदन बहादुर तिवारी, मुकेश मिश्रा, ऋषिकेश, सिद्धार्थ मणि ,उमेश तिवारी, उमेश कुमार सहित तमाम श्रोता उपस्थित थे।

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