सोनभद्र । जिले की ओबरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बिल्ली मारकुंडी स्थित मेसर्स कृष्णा माइनिंग खदान हादसे में मजदूरों की मौत की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक कुल सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस भीषण हादसे ने न सिर्फ जिले को हिलाकर रख दिया, बल्कि सालों से चले आ रहे खनन माफिया और खनन विभाग की सांठगांठ की परतें भी खोल दीं। बताते चलें कि ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खदान त्रासदी प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है। खदान में जहां नियमों के तहत अधिकतम गहराई में खुदाई की अनुमति भी नहीं थी, वहां हैरतअंगेज तरीके से 150 फीट से अधिक गहराई तक खोद दिया गया, जो अवैध खनन नेटवर्क और सिस्टम की घोर विफलता का प्रमाण है, जिसमें माफिया और विभाग की चुप्पी ने कई मजदूरों की जान ले ली।
भयावह मंजर की कहानी, प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी –
प्रत्यक्षदर्शी छोटू की माने तो, 15 नवंबर को कुल 18 मजदूर खदान में सुबह 11 बजे से काम कर रहे थे, कई घंटे से मशीनें बिना रुके चल रही थीं। गहराई बढ़ चुकी थी और दीवारों पर दरारें दिखने लगी थीं, लेकिन मजदूरों की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया। दोपहर तकरीबन 2 से 2.30 बजे अचानक जोरदार धमाके के साथ खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे खदान के उस हिस्से में अंधेरा छा गया और पल भर में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। वहाँ सिर्फ धूल का गुबार और मजदूरों के चीखों की आवाजें सुनाई दे रही थी। उसके दो भाई भी उसी मलबे के नीचे दब गए। वह बाथरूम करने बाहर की तरफ गए था इसलिए बच गया, उसने इसकी सुचना तत्काल अपने मालिक को दी। वहाँ पहुंचे मालिक ने गंभीर रूप से घायल तीन मजदूरों को वहाँ से निकाल कर ले गए जबकि अन्य मजदूरों कई टन मलबे के नीचे दबे रहे।
जिला प्रशासन के नियमानुसार खनन के दावों की खुली पोल –
मिली जानकरी के अनुसार, मौत की यह खदान साल 2016 से सक्रिय थी और यहाँ लगातार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर संचालन जारी था। जिला प्रशासन व खनन विभाग की अनदेखी और खनन माफियाओं के सांठगांठ ने इस अवैध तंत्र को मजबूत बना दिया था। जिससे खनन माफिया बेरोकटोक मौत के इस खदान में लगातार खनन कार्य जारी रखे रहे। वहीं कुछ समय बाद यह खदान एक पेटी ठेकेदार चलाने लगा, जिसके बाद पैसे, हिस्सेदारी और गैरकानूनी खनन का खेल और गहरा होता चला गया। और विभाग चुपचाप देखता है



