अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्थाओं और प्रशासन को नई दिशा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। लगभग चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने वाले मिश्र अब मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक और संचालन संबंधी मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
आखिर जीतेंद्र मिश्र को ही क्यों चुना गया?
जीतेंद्र मिश्र का चयन केवल उनके सैन्य पद के कारण नहीं हुआ। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े स्तर पर ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभालने के अनुभव को इस पद के लिए महत्वपूर्ण माना गया। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रह चुके हैं और भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। उनके पास 3,000 से अधिक घंटे की उड़ान का अनुभव भी बताया गया है।
मिश्र ने भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड का नेतृत्व भी किया। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह इसी कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। इस दौरान उनकी भूमिका देश की पश्चिमी सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों के संचालन में रही।
5,585 आवेदनों में से हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO के चयन के लिए बाकायदा प्रक्रिया अपनाई। इसके लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई गई थी। देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद 16 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और 11-12 अगस्त को अयोध्या में उनके साथ आमने-सामने बातचीत की गई।
उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि, कार्य अनुभव, व्यक्तित्व और पेशेवर क्षमता का आकलन करने के बाद तीन नामों की सिफारिश की गई। इनमें पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र के अलावा मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वासराव और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। अंततः ट्रस्ट ने जीतेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगाई।
राम मंदिर ट्रस्ट में क्या होगी CEO की भूमिका?
CEO का पद मंदिर ट्रस्ट के बढ़ते प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से बनाया गया है। CEO के जिम्मे प्रशासनिक, वैधानिक और वित्तीय मामलों की निगरानी के साथ संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना होगा।
ट्रस्ट की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में बड़े स्तर पर संगठन चलाने, टीमों का नेतृत्व करने और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव रखने वाले व्यक्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
दान व्यवस्था और पारदर्शिता भी बड़ी चुनौती
जीतेंद्र मिश्र की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर ट्रस्ट अपनी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हाल के महीनों में मंदिर के चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर वित्तीय प्रबंधन CEO के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल हो सकते हैं।
देवरिया से अयोध्या तक का सफर
जीतेंद्र मिश्र उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में लगभग चार दशक तक सेवा की और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक समेत कई सैन्य सम्मान मिल चुके हैं।
इस तरह राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक अनुभव, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और बड़े संस्थागत ढांचे को संभालने की विशेषज्ञता से जोड़कर देखा जा रहा है।

