जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले के पीपाड़ क्षेत्र के जालीवाड़ा खुर्द गांव के किसान सुमेरसिंह कछवाहा ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर खेती को मुनाफे का जरिया बना दिया है। सीमित कृषि भूमि में वैज्ञानिक तरीके से खेती, सब्जियों की नर्सरी और डेयरी को एक साथ जोड़कर उन्होंने अपनी कृषि आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
3 लाख से बढ़कर 14-15 लाख रुपये हुई आय
सुमेरसिंह के पास करीब 13 बीघा खेती योग्य जमीन है। कुछ समय पहले तक उनकी सालाना कृषि आय लगभग 3 लाख रुपये के आसपास थी। खेती में नई तकनीकों को अपनाने के बाद उनकी आय बढ़कर करीब 14 से 15 लाख रुपये सालाना तक पहुंच गई।
उन्होंने खेती में मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया। इससे पानी की बचत के साथ फसलों की बेहतर देखभाल और उत्पादन में मदद मिली। सब्जियों की खेती को उन्होंने अपनी आय का प्रमुख आधार बनाया।
सब्जियों की नर्सरी से भी कमाई
किसान सुमेरसिंह ने सिर्फ सब्जियों की खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने सब्जियों की नर्सरी तैयार कर पौधों की बिक्री को भी आय का स्रोत बनाया। नर्सरी से अतिरिक्त आमदनी होने के साथ आसपास के किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध होने लगे।
इसके अलावा वे अपनी जमीन पर अनाज का उत्पादन भी करते हैं, जिससे परिवार की जरूरतों के साथ कृषि आय का एक अन्य स्रोत बना हुआ है।
डेयरी को भी बनाया आय का जरिया
खेती के साथ सुमेरसिंह ने डेयरी व्यवसाय को भी अपने कृषि मॉडल में शामिल किया है। पशुपालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त होती है और कृषि गतिविधियों के साथ इसका तालमेल भी बना रहता है।
इस तरह उन्होंने खेती, नर्सरी और डेयरी को एक-दूसरे से जोड़कर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें एक ही स्रोत पर निर्भरता कम होती है और पूरे साल अलग-अलग माध्यमों से आमदनी के अवसर बने रहते हैं।
आसपास के किसानों के लिए बने प्रेरणा
सुमेरसिंह कछवाहा की सफलता यह दिखाती है कि सीमित जमीन में भी यदि फसल चयन, सिंचाई प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर खेती की जाए तो कृषि को बेहतर आय का माध्यम बनाया जा सकता है।
उनकी खेती का मॉडल अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। वे पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन और आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

