नई दिल्ली। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में आरएसएस, भाजपा या सरकार की आलोचना करने की पूरी आजादी है, लेकिन देश और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह तुम्हें बहुत ज्यादा महंगा पड़ेगा।” उनके मुताबिक राजनीतिक या वैचारिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अलग विषय है।
मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर हुआ प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन शनिवार, 29 अगस्त, को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर हुआ। इसी स्थान पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
भागवत के कार्यक्रम को लेकर कुछ संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान आरएसएस और भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। इसी बीच सामने आए वीडियो को लेकर तिरंगे के कथित अपमान का मामला सामने आया, जिस पर रिजिजू ने आपत्ति जताई।
आलोचना का अधिकार, लेकिन राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान जरूरी
रिजिजू ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि किसी संगठन, राजनीतिक दल या सरकार की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने देश और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को स्वीकार नहीं करने की बात कही।
उधर, भागवत ने अपने संबोधन में अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से अपनी भारतीय जड़ों और मूल्यों को बनाए रखते हुए जिस देश में वे रह रहे हैं, उसके प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने की अपील की। उन्होंने अमेरिका को प्रवासी भारतीयों की ‘कर्मभूमि’ बताते हुए वहां के प्रति निष्ठा और कर्तव्य निभाने पर जोर दिया।
तिरंगे से जुड़े कथित अपमान के वीडियो सामने आने के बाद इस मुद्दे पर भारत में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है।

