लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सुशासन के लिए लोक सेवकों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। उन्होंने लोकायुक्त जैसी संवैधानिक संस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने तथा शिकायतों का निष्पक्ष और तथ्यपरक निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में लोकायुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस से जुड़े कार्यक्रम में कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि आम लोगों का उस पर कितना भरोसा है। संस्था को समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और शासन की पारदर्शिता का भरोसा देना चाहिए।
लोक सेवकों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर
सीएम योगी के अनुसार सरकारी व्यवस्था में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी से ही जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोक शिकायतों की जांच करते समय तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसी भी शिकायत पर केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय उसकी वास्तविकता की जांच आवश्यक है।
झूठी और निराधार शिकायतों पर भी हो कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शिकायत निवारण व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक के खिलाफ जानबूझकर झूठी या निराधार शिकायत करता है, तो ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश लोकायुक्त व्यवस्था में झूठी शिकायतों के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान भी है। इसका उद्देश्य शिकायत व्यवस्था को जवाबदेह बनाना और उसका अनुचित इस्तेमाल रोकना है।
जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की सफलता के लिए जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। लोकायुक्त जैसी संस्थाएं तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं, जब वे निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
उन्होंने संस्थागत व्यवस्था को और मजबूत करने तथा आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

