भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और पूजा में श्रद्धा के साथ कुछ नियमों का पालन करने की भी धार्मिक परंपरा रही है। शास्त्रीय मान्यताओं में भगवान की सेवा के दौरान होने वाली कुछ भूलों को ‘सेवा अपराध’ कहा गया है। ऐसी ही मान्यता के अनुसार ठाकुर जी की पूजा में 32 प्रकार के अपराध बताए गए हैं।
जन्माष्टमी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों में लड्डू गोपाल की पूजा और सेवा करते हैं। ऐसे में इन नियमों को जानना इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि पूजा के दौरान अनजाने में भी कोई ऐसी गलती न हो।
क्या हैं ठाकुर जी की पूजा के 32 अपराध?
धार्मिक परंपरा में बताए गए इन सेवा-अपराधों का संबंध पूजा के समय शुद्धता, आचरण, वस्त्र और भगवान को भोग लगाने जैसी बातों से है।
1. अपवित्र वस्तु या अन्न भगवान को अर्पित करना।
2. दूसरे का अन्न ग्रहण करके भगवान की सेवा करना।
3. स्त्री-संग के बाद भगवान की मूर्ति का स्पर्श करना।
4. रजस्वला स्त्री को देखकर पूजा करना।
5. मृतक के स्पर्श के बाद शुद्ध हुए बिना भगवान की सेवा करना।
6. मृतक को देखने के बाद आचमन किए बिना भगवान का स्पर्श करना।
7. पूजा के बीच शौच के लिए जाकर लौटने के बाद उचित शुद्धि किए बिना पूजा करना।
8. पूजा के समय नीले वस्त्र पहनना।
9. भगवान की पूजा के दौरान अनुचित या अनर्गल बातें करना।
10. शास्त्र-विरुद्ध वस्तु का स्पर्श करने के बाद शुद्धि किए बिना पूजा करना।
क्रोध और अनुचित वस्त्रों से भी जुड़ी मान्यता
11. क्रोध की अवस्था में भगवान की पूजा करना।
12. निषिद्ध या अनुचित कार्यों के लिए भगवान से प्रार्थना करना।
13. पूजा के समय लाल वस्त्र पहनना।
14. अंधकार में भगवान की मूर्ति का स्पर्श करना।
15. काले वस्त्र पहनकर भगवान की सेवा करना।
16. बिना धोती पहने भगवान की सेवा करना।
17. स्वयं पकाया हुआ भोजन भगवान को अर्पित किए बिना खाना।
18. मांस-मछली का सेवन करके भगवान की सेवा करना।
19. कुछ विशेष मांसाहारी आहार का सेवन करने के बाद भगवान की सेवा करना।
20. दीपक का स्पर्श करने के बाद हाथ धोए बिना पूजा करना।
श्मशान से लेकर भोग और मंदिर के नियम तक
21. श्मशान से लौटने के बाद शुद्ध हुए बिना भगवान की सेवा करना।
22. पूजा में कुछ निषिद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करके भगवान की सेवा करना।
23. हींग आदि का सेवन करके पूजा करना।
24. मदिरा का सेवन करके भगवान की सेवा करना।
25. कुछ विशेष प्रकार की सब्जियों का सेवन करने के बाद भगवान की पूजा करना।
26. दूसरे व्यक्ति के कपड़े पहनकर भगवान की सेवा करना।
27. नए अन्न को देवताओं और पितरों को अर्पित किए बिना स्वयं ग्रहण करना।
28. जूते पहनकर जलाशय या बावली जैसे पवित्र स्थान पर जाना।
29. शरीर पर उबटन लगाने के बाद स्नान किए बिना भगवान की सेवा करना।
30. अजीर्ण की अवस्था में भगवान की सेवा करना।
31. चंदन और पुष्प अर्पित किए बिना पहले धूप देना।
32. मंगल शब्द बोले बिना मंदिर का द्वार खोलना।
इनमें से कई नियम आज की सामान्य गृहस्थ पूजा-पद्धति से अलग या बहुत विशिष्ट हैं। इसलिए इन्हें धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय मान्यता के संदर्भ में समझना चाहिए, न कि हर परिस्थिति में सभी परिवारों पर लागू होने वाले अनिवार्य नियम के रूप में।
पूजा में सबसे जरूरी है श्रद्धा और स्वच्छता
धार्मिक मान्यताओं में पूजा के नियमों के साथ श्रद्धा, भक्ति, स्वच्छता और सात्विक भाव को भी विशेष महत्व दिया जाता है। यदि घर में ठाकुर जी की सेवा की जाती है तो अपनी पारिवारिक परंपरा और गुरु या आचार्य द्वारा बताई गई पूजा-विधि का पालन करना उचित माना जाता है।
जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं और उन्हें माखन-मिश्री, फल तथा अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करते हैं। ऐसे में पूजा करते समय मन को शांत रखना और भगवान के प्रति प्रेम एवं समर्पण का भाव रखना ही भक्ति का मूल माना जाता है।

