नई दिल्ली। “पैसा बचाओ, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराओ और म्यूचुअल फंड में SIP शुरू करके लंबे समय तक निवेश करते रहो”—पर्सनल फाइनेंस की यह सलाह लंबे समय से भारतीय परिवारों में आम रही है। लेकिन अब Gen-Z की वित्तीय सोच तेजी से बदल रही है। 1996 से 2010 के बीच जन्मी यह पीढ़ी पैसे को लेकर पारंपरिक सोच से अलग नजरिया रखती है।
आज के युवा सिर्फ बचत और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देने के बजाय लिक्विडिटी, बेहतर रिटर्न, डिजिटल इन्वेस्टमेंट और आर्थिक आजादी को भी महत्व दे रहे हैं। सोशल मीडिया, फिनटेक ऐप्स और निवेश से जुड़ी ऑनलाइन जानकारी ने उनकी वित्तीय आदतों को काफी प्रभावित किया है।
FD और SIP से क्यों बदल रहा है युवाओं का नजरिया?
Gen-Z के बीच यह सोच बढ़ रही है कि सिर्फ पैसा बचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही जगह लगाकर अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करना भी जरूरी है। इसी वजह से कई युवा पारंपरिक FD के साथ-साथ दूसरे निवेश विकल्पों को भी समझने और अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
वहीं, SIP को लेकर भी युवाओं का नजरिया पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। बल्कि कई युवा SIP को अपने निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाते हैं, लेकिन वे लंबे समय तक बिना समीक्षा किए निवेश करने के बजाय बाजार, रिटर्न और अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से रणनीति बदलना पसंद करते हैं।
YOLO और FOMO का भी असर
Gen-Z की वित्तीय आदतों पर YOLO (You Only Live Once) और FOMO (Fear of Missing Out) जैसी प्रवृत्तियों का भी असर देखने को मिलता है। यह पीढ़ी अनुभवों, यात्रा, गैजेट्स, मनोरंजन और लाइफस्टाइल पर खर्च को भी महत्व देती है।
हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवा शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, डिजिटल गोल्ड और अन्य निवेश विकल्पों के बारे में पहले की पीढ़ियों की तुलना में कम उम्र में जानकारी हासिल कर रहे हैं।
बचत से ज्यादा ‘स्मार्ट मनी मैनेजमेंट’ पर जोर
आज के युवा पारंपरिक तरीके से सिर्फ बचत करने के बजाय कमाई, खर्च, निवेश और वित्तीय लक्ष्य—चारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए इमरजेंसी फंड, बीमा, निवेश और नियमित कैश फ्लो जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

