नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारी दबाव देखने को मिला। Nifty 50 ने 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास कमजोरी दिखाई, जबकि Sensex में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर किया है।
हालांकि, मौजूदा गिरावट को सीधे तौर पर ‘शेयर बाजार क्रैश’ कहना जल्दबाजी होगी। बाजार में फिलहाल बिकवाली और अस्थिरता बढ़ी है और आने वाले सत्रों में 24,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है।
क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?
1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। निवेशक अब इस बात को लेकर आशंकित हैं कि संघर्ष लंबा खिंचने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है।
2. 90 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
भू-राजनीतिक तनाव के बीच Brent crude करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है। इससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
3. अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की आशंका
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और फेडरल रिजर्व की ओर से महंगाई पर सख्त रुख के संकेतों ने सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंकाओं को बढ़ाया है। इससे निवेशकों का रुझान जोखिम वाली परिसंपत्तियों से हटकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जा सकता है।
4. ग्लोबल मार्केट में भी दबाव
एशियाई बाजारों में भी सोमवार को कमजोरी रही। अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ते तेल भाव के कारण वैश्विक निवेशकों में ‘Risk-Off’ सेंटीमेंट देखने को मिला। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
5. विदेशी निवेश और MSCI रीबैलेंसिंग का असर
बाजार में MSCI इंडेक्स के रीबैलेंसिंग से जुड़े प्रवाह को लेकर भी सतर्कता है। कुछ बड़ी कंपनियों में इंडेक्स वेटेज में बदलाव के कारण संस्थागत स्तर पर खरीद-बिक्री बढ़ सकती है। Reliance Industries में घटे MSCI वेटेज से संभावित आउटफ्लो की आशंका भी बाजार की चिंता बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।
अब Nifty के लिए 24,000 कितना महत्वपूर्ण?
तकनीकी रूप से 24,000 का स्तर Nifty के लिए अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है। बाजार इस स्तर के ऊपर टिकता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौट सकती है। वहीं, अगर 24,000 के नीचे लगातार कमजोरी बनी रहती है तो 23,900–23,800 के क्षेत्र की ओर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ, बाजार में सुधार आने की स्थिति में 24,300–24,400 के क्षेत्र में पहली बड़ी चुनौती दिखाई दे सकती है। इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती आने पर बाजार का रुख कुछ बेहतर हो सकता है।
क्या शेयर बाजार क्रैश होने वाला है?
फिलहाल उपलब्ध संकेतों के आधार पर बाजार में तेज गिरावट और अस्थिरता जरूर है, लेकिन इसे शेयर बाजार क्रैश की निश्चित शुरुआत कहना उचित नहीं होगा। आगे की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए संदेश: ऐसे समय में घबराकर जल्दबाजी में खरीद-बिक्री करने के बजाय अपने निवेश की अवधि, जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनियों के फंडामेंटल को ध्यान में रखना जरूरी है। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान छोटे निवेशकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

