नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की समयसीमा को लेकर करदाताओं के बीच एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। अगर किसी करदाता ने निर्धारित अंतिम तारीख तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो देरी की स्थिति में उसे अतिरिक्त शुल्क और ब्याज का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आखिरी समय का इंतजार करने के बजाय समय पर ITR दाखिल करना बेहतर माना जाता है।
देरी से ITR भरने पर लग सकती है लेट फीस
आयकर नियमों के तहत निर्धारित समयसीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर करदाता को लेट फीस देनी पड़ सकती है। इसकी राशि करदाता की कुल आय और लागू नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए समयसीमा बीतने के बाद ITR दाखिल करने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
टैक्स बकाया है तो ब्याज का भी असर
अगर करदाता पर टैक्स की देनदारी बनती है और उसका भुगतान समय पर नहीं किया गया है, तो देरी की अवधि के लिए ब्याज भी लग सकता है। यही वजह है कि केवल ITR दाखिल करना ही नहीं, बल्कि बकाया टैक्स की सही गणना और समय पर भुगतान करना भी जरूरी है।
रिफंड मिलने में हो सकती है देरी
समय पर ITR दाखिल करने का एक फायदा यह भी है कि अगर करदाता का टैक्स ज्यादा कट गया है और उसे रिफंड मिलना है, तो रिफंड की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सकती है। देर से रिटर्न दाखिल करने पर रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है।
आखिरी तारीख को लेकर रखें सावधानी
करदाताओं को अपनी श्रेणी और संबंधित आकलन वर्ष के लिए लागू ITR की अंतिम तारीख आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जरूर जांच लेनी चाहिए। अलग-अलग परिस्थितियों में ITR दाखिल करने की समयसीमा और नियम अलग हो सकते हैं।
इसलिए अगर आपका ITR अभी तक दाखिल नहीं हुआ है, तो अंतिम तारीख और अपने ऊपर लागू नियमों की जांच कर जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करना बेहतर होगा।

