औरैया। शहर क्षेत्र की इण्डियन ऑयल पुलिस चौकी पर स्थापित वीरांगना अवंतीबाई की प्रतिमा जहाँ पर आज वीरांगना अवंती बाई समिति की प्रबंधक योगाचार्य अनिल राजपूत ने बताया कि वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना अवंतीबाई ने देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए 20 मार्च 1858 को देश की आजादी के लिए बलिदान हो गई थी। वीरांगना अवंती बाई का जन्म मध्य प्रदेश के शिवानी जिले के मानकेडी गांव हुआ था उनका विवाह 17 वर्ष की आयु में रामगढ़ के राजा विक्रमादित्य के साथ हुआ था उनके दो पुत्र हुए थे अमन सिंह और शेर सिंह पति का देहांत 18 57 में शादी के कुछ दिनों बाद हो गया इसके बाद रानी ने स्वयं राज्य की बागडोर संभाली रामगढ़ का साम्राज्य 4000 वर्ग मील तक फैला था जिसमें मंडला हिंडोरिया सुहागपुर अमरकंटक तमाम भू-भाग था। . अंग्रेजों ने जब राज हड़पने की नीति बनाई तो रानी ने संघर्ष छेड़ दिया और स्वजाति राजाओं को एकत्र कर कहा या तो संघर्ष में साथ हो अन्यथा चूड़ियां पहन कर घर बैठे हैं। अंग्रेजों के डिप्टी कमिश्नर वॉर्डिंगटन ने अपनी पल्टन को लेकर रानी के महल पर आक्रमण किया घनघोर युद्ध हुआ ऊंट का तो पखाना तितर-बितर हो गया। बंदूको से और तलवारों से भयंकर लड़ाई हुई अंत में अंग्रेजोसे सतपुड़ा के जंगलों में भयंकर युद्ध करते हुए अंग्रेजों से घिरा होने पर अपने सेनापति उमराव सिंह से तलवार मांगी और खुद को पेट में मारकर चिरनिद्रा में सो गयी। अंग्रेजी पुस्तक सी यू विल सी एस में लिखा है रानी संघर्ष शील और बहादुर थी। उन्होंने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से समझौता नहीं किया था। वहीं मीडिया अधिकार मंच भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतेन्द्र सेंगर ने कहा कि देश की आजादी में वीरांगनाओं ने अहम भूमिका निभाई है जोकि सदैव स्मरणीय रहेगा, सतेन्द्र सेंगर ने वीरांगना अवंतीबाई के पैरों पर पुष्प अर्पित करते उन्हें नमन कर श्रद्धाजलि दी। कार्यक्रम में अजय राजपूत,सहित सतेन्द्र सेंगर राष्ट्रीय अध्यक्ष, अनिल अवस्थी राष्ट्रीय महामंत्री मीडिया अधिकार मंच भारत,अंकित तिवारी, धर्मेंद्र सिंह विकास अनुरोध श्याम सिंह करण सिंह भूपेंद्र सिंह सहित तमाम जर्मन लोगों ने शहीद वीरांगना अवंती बाई को पुष्प अर्पित कियें।